गौचर : मुख्यमंत्री घस्यारी योजना तोड़ रही दम!

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केएस असवाल 

गौचर : पशुपालन के क्षेत्र में श्वेत क्रांति को बढ़ावा देने व महिलाओं की जंगलों पर निर्भरता समाप्त करने के उद्देश्य से लागू की गई मुख्यमंत्री घस्यारी योजना पूरी तरह से टांय-टांय फिस होती नजर आ रही है। वर्तमान में जंगली जानवरों से महिलाएं जंगल जाने से कतरा रही हैं। नौबत ऐसी आ गई है कि काश्तकारों के सामने पशुओं को चारा का घोर संकट पैदा हो गया है।

 

पहाड़ी क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादकता की क्षमता बढ़ाकर लोगों को श्वेत क्रांति के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने व महिलाओं की जंगलों पर निर्भरता समाप्त करने के लिए पिछले कुछ साल पहले केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के हाथों देहरादून में मुख्यमंत्री घस्यारी योजना का शुभारंभ करवाया गया था। तब उम्मीद की जा रही थी कि दो रुपए किलो मिलने वाले इस हरी घास से लोगों की मुस्किलें काफी हद तक आसान हो जाएंगी। लेकिन कारण जो भी हो कास्तकारों को इस योजना के तहत मिलने वाली हरी घास उपलब्ध न कराए जाने से उनके सामने दुग्ध उत्पादन के अलावा पशुओं के भरण पोषण का भी संकट पैदा हो गया है। वर्तमान में लंबे समय से बाघों व भालुओं के आतंक को देखते हुए ग्रामीण महिलाएं जंगल जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही हैं। बताया जा रहा है कि सरकार ने हरी घास शैलेज सप्लाई करने वाली फर्म व ट्रांसपोर्टर को पिछले तीन महीने से सब्सिडी का भुगतान न करने से दोनों कंपनियों ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। इस संबंध में हरी घास सप्लाई करने वाली कंपनी के प्रबंधक संपर्क साधा गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। दूसरी ओर पशुओं की भूख से मौत न हो इसके लिए राहत के नाम से सस्ते दामों में सूखा भूसा उपलब्ध कराया जाता था। पशुपालन विभाग के माध्यम से मिलने वाला यह भूसा कुछ सालों तक नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाता था। लेकिन पिछले दो तीन सालों से इस भूसे की कीमत चार गुनी बढ़ाने के बावजूद भी भूसा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। ऐसी दशा में पहाड़ का पशुपालक गंभीर संकट में फंस गया है। नौबत यहां तक पहुंच गई है कि पशुपालक अपने दुधारू जानवरों को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो गया है। जानकारी के अनुसार साइलेज एंड एथनिक काउज प्राइवेट कंपनी का कहना है कि पिछले तीन महीने से भुगतान न होने से उन्हें आगे कच्चा माल मंगवाने परेशानी हो रही है।

प्रगतिशील कास्तकार विजया गुसाईं, कंचन कनवासी, जशदेई कनवासी,भागवत भंडारी, रमेश डिमरी,नंदा गौरा योजना के तहत दुगध उत्पादन के क्षेत्र में सम्मानित होने वाली नौटी की नीमा मैठाणी, आदिबद्री के हरीश रावत,बमोथ के पूर्व प्रधान प्रकाश रावत, क्वींठी के कमल रावत आदि पशुपालकों का कहना है कि घस्यारी योजना के तहत हरी घास व भूसा न मिलने से उनके सामने पशुओं के भरण पोषण का भी संकट पैदा हो गया है।

 

 

 

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